IPL में देर से हुए साइनिंग्स: क्या है इसकी वजह?
आईपीएल सीजन के अंतिम लीग मैचों से पहले फ्रेंचाइजी ने कई देर से साइनिंग्स की हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स ने चोटिल मथीशा पथिराना के रिप्लेसमेंट के तौर पर लुवनिथ सिसोदिया को चुना, मुंबई इंडियंस ने क्विंटन डी कॉक और राज अंगद बावा की जगह महिपाल लोमरोर और रुचित अहिर को साइन किया, जबकि राजस्थान रॉयल्स ने चोटिल रवि सिंह की जगह इमानजोत चहल को शामिल किया।
यह समझना जरूरी है कि प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी टीमों ने भी ये साइनिंग्स क्यों कीं। क्रिकबज की पड़ताल में सामने आया कि हर फ्रेंचाइजी की अपनी अलग वजह थी – कुछ ने जरूरत से, तो कुछ ने रणनीति के तहत ये कदम उठाया।
मुख्य नियम:
- चोट या बीमारी के मामले में सिर्फ एक मैच के लिए भी रिप्लेसमेंट की अनुमति है।
- नियम 6.1 (b) के अनुसार, सीजन-एंडिंग चोट वाले खिलाड़ी को बदला जा सकता है, भले ही वह उस सीजन में पहले ही खेल चुका हो।
टीमों की रणनीति:
- केकेआर: प्लेऑफ के लिए विकेटकीपिंग विकल्प सुनिश्चित करना चाहते थे। अंगक्रिश रघुवंशी के सीजन-एंडिंग चोट के बाद टीम के पास सिर्फ एक भारतीय विकेटकीपर (तेजस्वी दहिया) बचा था।
- राजस्थान रॉयल्स: प्लेऑफ में पहुंचने के बाद टीम को चोटिल रवि सिंह के कवर की जरूरत थी।
- मुंबई इंडियंस: उनकी रणनीति अगले सीजन के लिए खिलाड़ी पूल बढ़ाने की थी। 24 मई के बाद साइनिंग नहीं हो सकती थी, इसलिए उन्होंने नीलामी में खरीदे बिना ही नए खिलाड़ियों को अनुबंधित कर लिया।
अहम प्रावधान:
- फ्रेंचाइजी रिप्लेसमेंट खिलाड़ी और बदले गए खिलाड़ी दोनों पर अगले सीजन के लिए अधिकार बरकरार रख सकती है।
- रिप्लेसमेंट खिलाड़ी की फीस उस सीजन के सैलरी कैप पर प्रभाव नहीं डालती।
- नियम 6.7: रिप्लेसमेंट खिलाड़ी की लीग फीस उस सीजन के सैलरी कैप के लिए नजरअंदाज की जाएगी। अगले सीजन के लिए यह फीस सैलरी कैप में जोड़ी जाएगी।
