इंग्लैंड, भारत और लॉर्ड्स में पहली महिला टेस्ट की लंबी राह
खेल का इतिहास विरोधाभासों से भरा होता है। यह विरोधाभास इस सप्ताह लॉर्ड्स में देखने को मिलेगा, जब यह ऐतिहासिक मैदान अपनी पहली महिला टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा। यह 2026 में हो रहा है – 142 साल और 150 पुरुष टेस्ट मैचों के बाद।
एमसीसी, जिसकी स्थापना 1787 में हुई, दो शताब्दियों से अधिक समय तक केवल पुरुषों के लिए खुला था। 1998 में महिला सदस्यता के लिए दो-तिहाई बहुमत से वोट पारित हुआ।
भारत का लॉर्ड्स टेस्ट में होना 40 साल पुरानी घटना के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। 1986 में डायना एडुलजी की अगुवाई वाली भारतीय टीम को लॉर्ड्स पवेलियन में प्रवेश से रोक दिया गया था। एडुलजी ने एमसीसी को "पुरुष अहंकारी सूअर" कहा था।
जेमिमा रॉड्रिग्स ने इसे "बहुत भावनात्मक पल" बताया, और हरमनप्रीत कौर ने कहा कि "लॉर्ड्स में खेलना सपनों में से एक है"।
मैच का महत्व
इंग्लैंड टी20 विश्व कप से बाहर होने के बाद लॉर्ड्स लौट रहा है। भारत के लिए 2026 निराशाजनक रहा है।
भारत का टेस्ट में शानदार रिकॉर्ड है – पर्थ में ऑस्ट्रेलिया से हार उनकी 2006 के बाद पहली हार थी। उन्होंने 2023-24 में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को घर में हराया। इंग्लैंड के खिलाफ उनकी एकमात्र हार 1995 में हुई थी।
टीम की तैयारी
भारत के पास बल्लेबाजी में अनुभव और फ्लैमबॉयेंस का मिश्रण है। स्पिन आक्रमण मजबूत है, हालांकि स्नेह राणा और श्री चरणी के बीच चयन का फैसला लेना होगा। तेज गेंदबाजी में रेणुका सिंह ठाकुर, सायली सतघरे और क्रांति गौड़ विकल्प हैं।
इंग्लैंड की टीम में बदलाव हुए हैं – नैट साइवर-ब्रंट पहली बार टेस्ट में कप्तानी करेंगी। डैनी वायट-हॉज, केट क्रॉस और चार्ली डीन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों को नहीं चुना गया। ग्रेस पॉट्स और मैडी विलियर्स को मौका मिल सकता है।
इंग्लैंड का तेज गेंदबाजी आक्रमण मजबूत है – लॉरेन बेल और लॉरेन फाइलर 120 किमी/घंटा से अधिक की गति डाल सकती हैं।
तम्मी ब्यूमोंट इस टेस्ट के बाद अपने 17 साल के करियर को अलविदा कहेंगी।
पिच और दर्शक
पिछले महीने इंग्लैंड-न्यूजीलैंड पुरुष टेस्ट में गेंद खतरनाक तरीके से उछल रही थी और नीची रहती थी।
दर्शकों की संख्या महत्वपूर्ण होगी। एमसीजी में एशेज टेस्ट में कुल 35,365 दर्शक आए थे। लॉर्ड्स में नया रिकॉर्ड बनना महिला टेस्ट क्रिकेट के लिए स्वागतयोग्य संकेत होगा।
