यह भारतीय टीम टेस्ट के लिए भी रोडमैप बना सकती है – निरंजना नागराजन
टी20 वर्ल्ड कप फाइनल के पांच दिन बाद, लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड इतिहास के गवाह बनेगा जब इंग्लैंड और भारत के बीच पहला महिला टेस्ट मैच खेला जाएगा। भारत ने इंग्लैंड में नौ टेस्ट में कोई हार नहीं झेली है, जबकि दो जीते हैं – टॉनटन (2006) और वॉर्म्सली (2014) में।
इस जीत की गवाह रहीं निरंजना नागराजन, जिन्होंने वॉर्म्सली में 4/19 की शानदार गेंदबाजी की और 27 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली।
वॉर्म्सली टेस्ट को कितनी याद करती हैं?
यह मेरे करियर का नंबर 1 मैच है। आठ में से 11 खिलाड़ी डेब्यू कर रहे थे। जब मैंने झूलन के साथ गेंदबाजी शुरू की और मिताली ने मुझे गेंद थमाई – वो दृश्य आज भी आंखों के सामने हैं।
इस मैच की तैयारी कैसी थी?
बेंगलुरू के अलूर में कैंप लगा। हमने लड़कों के खिलाफ मल्टी-डे गेम खेले। लंबी पारियां, लंबे स्पेल – यह अनुभव अनोखा था। ड्यूक्स बॉल से पहली बार गेंदबाजी करना बहुत खास था।
ड्यूक्स बॉल से अनुभव?
जब गेंद मेरे हाथ से छूटती थी तो उंगलियों से निकलने की आवाज़ सुनाई देती थी। मुझे पता था कि मैं अच्छा करूंगी। घबराहट थी लेकिन अच्छी थी।
दर्शकों का समर्थन?
आधा मैदान भारतीयों से भरा था। वे 'खाने पर आओ' बोलते थे और खाना देते थे।
पहले दिन 16 विकेट गिरे, आप नाबाद रहीं। होटल लौटते वक्त क्या महसूस हुआ?
गेंदबाजी मेरा कर्तव्य है, बल्लेबाजी प्यार है। सारा दिन संतोषजनक था। सेलेक्टर्स, माता-पिता, दोस्तों के फोन आए। अगले दिन फिर बल्लेबाजी का उत्साह था।
लॉर्ड्स में पहला महिला टेस्ट – कितना महत्वपूर्ण?
यह सिर्फ एक मैच नहीं होगा। जब भारतीय महिला टीम सफेद जर्सी में उतरती है, यह ऐतिहासिक है। आज लोग स्मृति, हरमन, जेमिमा को जानते हैं। अब समय है ज्यादा टेस्ट खेलने का। यह टीम टेस्ट क्रिकेट के लिए रोडमैप बना सकती है।
युवा लड़कियों में टेस्ट क्रिकेट की चाह कैसे जगेगी?
जैसे पुरुष रणजी ट्रॉफी से टेस्ट का महत्व समझते हैं, वैसे ही डोमेस्टिक मल्टी-डे मैचों की जरूरत है। हर कोई टी20 के लिए नहीं बना। टेस्ट मटेरियल खिलाड़ियों को पहचानना होगा।
लॉर्ड्स में टेस्ट – महिला क्रिकेट के लिए कितना बड़ा?
लॉर्ड्स में खेलना स्वर्ग में खड़े होने जैसा है। यह सुनहरा अवसर है। इंग्लैंड की टीम मजबूत है लेकिन भारत के पास अच्छी बल्लेबाजी और गेंदबाजी है।
महिला क्रिकेट के विकास पर?
जब मैं खेलती थी (0-10 पैमाने पर) 6 था, अब 8.5 या 9 है। लड़कियां अब 'मैं स्मृति बनना चाहती हूं' कहकर आती हैं। भारत ने जब वर्ल्ड कप जीता, मैं रो पड़ी – यह जीत व्यक्तिगत लगी।
