ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन (OCA) के चुनाव और राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम (NSGA) पर विवाद
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पृष्ठभूमि
ओडिशा क्रिकेट एसोसिएशन (OCA) के चुनाव लगभग एक वर्ष से लंबित हैं। NSGA 2025 के लागू होने के बाद, OCA ने उच्च न्यायालय में यह तर्क दिया कि चुनाव से पहले इस अधिनियम के प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए। -
BCCI का रुख
BCCI ने उच्च न्यायालय में दायर अपने बयान में कहा कि OCA को तुरंत चुनाव करना चाहिए, अन्यथा यह अपने स्वयं के नियमों, BCCI के मेमोरेंडम ऑफ़ असोसिएशन (MoA) और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करेगा। -
OCA अध्यक्ष पंकज लोचन मोहन्टे का बयान
- उन्होंने एक शपथपत्र में कहा कि OCA को BCCI के निर्णय के विपरीत कोई अलग रुख नहीं अपनाना चाहिए।
- उन्होंने यह भी बताया कि BCCI के MoA और नियमों से किसी भी विचलन से सदस्यता और अनुदान खतरे में पड़ सकते हैं।
- मोहन्टे ने यह भी दावा किया कि NSGA 2025 के तहत क्रिकेट को “निर्धारित खेल” के रूप में नामित नहीं किया गया है, अतः BCCI इस अधिनियम के अधीन नहीं है।
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कानूनी स्थिति
- OCA के सचिव संजय बेहरा, खजाना बिका श प्रधान और अध्यक्ष मोहन्टे ने छह वर्ष से अधिक समय से पद संभाला है, जो संविधान के अनुसार दो तीन‑वर्षीय कार्यकाल से अधिक है।
- उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे पर 22 सितंबर को सुनवाई तय की है।
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आगे की संभावनाएँ
- BCCI का वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) मुंबई में शुक्रवार को है, जहाँ OCA पर सलाह जारी की जा सकती है।
- यदि OCA चुनाव नहीं करती है, तो उसे BCCI के नियमों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के उल्लंघन के लिए दंडित किया जा सकता है।
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