
प्रज्ञन ओझा की नियुक्ति: क्रिकेट में 'सतता' (Continuity) का महत्व
BCCI ने वरिष्ठ पुरुषों के चयन समिति के अध्यक्ष के पद के लिए प्रज्ञन ओझा को चुना है, जबकि वासिम जाफर जैसे नए चेहरे को प्राथमिकता नहीं दी गई। यह निर्णय इस बात पर आधारित है कि वर्तमान चयन समिति और टीम प्रबंधन के बीच पहले से ही एक अच्छी समन्वय (coordination) है, जिसे विश्व कप के वर्ष में तोड़ना उचित नहीं था।
वासिम जाफर के लिए यह समय क्यों सही नहीं था:
- जाफर के पास 31 टेस्ट मैचों का अनुभव, रणजी ट्रॉफी में सबसे अधिक रन (12,038) और शतक (40) के रिकॉर्ड, और व्यापक कोचिंग अनुभव है।
- हालांकि, एक नए अध्यक्ष के रूप में उन्हें अपनी पसंद के चयनकर्ताओं (selectors) की टीम बनाने का अधिकार मिलता है। जाफर को एक ऐसी समिति में बैठना पड़ता जिसमें अन्य सदस्य उनके विचारों से अनुरूप नहीं हो सकते थे।
- अनुभवी स्रोतों के अनुसार, ऐसे पदों के लिए उम्मीदवारों को आमतौर पर आवेदन से कई महीने पहले संकेत दिए जाते हैं। जाफर का बिना किसी संकेत के आवेदन करना समय की दृष्टि से गलत था।
प्रज्ञन ओझा और रमेश पवार की भूमिका:
- प्रज्ञन ओझा (नया अध्यक्ष): वे इसी प्रणाली (system) से आते हैं और टीम प्रबंधन के साथ अच्छे संबंध रखते हैं। 40 वर्ष की उम्र में वे समिति के सबसे युवा सदस्य हैं, जो आज के दौर में अनुभव से अधिक प्राथमिकता पा रहा है। वे चयन समिति और टीम प्रबंधन के बीच एक मजबूत कार्य संबंध बनाए रखने में सक्षम हैं।
- रमेश पवार: वे एक उत्कृष्ट 'टीम प्लेयर' हैं। 2 टेस्ट और 31 ODI मैचों के साथ, उन्होंने भारत की महिला टीम, मुंबई, गुजरात के हेड कोच और BCCI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में बॉलिंग कोच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
निष्कर्ष:
BCCI को एक ऐसे नेता की आवश्यकता नहीं थी जो नई दिशा दें, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत थी जो मौजूदा सफलता को बनाए रखे। प्रज्ञन ओझा की नियुक्ति इस 'सतता' (continuity) को बनाए रखने का प्राकृतिक और तार्किक कदम है।





